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जलवायु परिवर्तन ने चक्रवात अर्नब की तबाही को 33% तक बढ़ाया: अध्ययन
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन ने चक्रवात अर्नब की विनाशकारी क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया। शोध के अनुसार तूफान की अधिकतम हवा की गति और वर्षा दर दोनों ही मानवजनित जलवायु परिवर्तन के कारण अधिक तीव्र हो गए थे।
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भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान और अंतर्राष्ट्रीय जलवायु विशेषज्ञों के एक संयुक्त अध्ययन में चक्रवात अर्नब पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण इस चक्रवात की कुल विनाशकारी क्षमता में 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्षों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन ने चक्रवात अर्नब की अधिकतम हवा की गति को लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ाया। इसके साथ ही, तूफान जब तटीय क्षेत्रों पर पहुंचा तो उसकी आंखवाली वर्षा दर में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ये दोनों कारक मिलकर तूफान की समग्र विनाशक क्षमता को उल्लेखनीय रूप से तीव्र बनाते हैं।
जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि महासागर की सतह का बढ़ता तापमान चक्रवातों को अधिक शक्तिशाली और तेजी से विकसित करने में सहायक होता है। इस प्रकार के अध्ययन भारत और दक्षिण एशिया के तटीय क्षेत्रों में आने वाले चक्रवातों की तीव्रता और प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि जलवायु परिवर्तन के इस तरह के प्रभावों को देखते हुए, आपदा प्रबंधन और तटीय सुरक्षा के लिए तैयारी को और भी अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।