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जलवायु क्षति के लिए वैश्विक दक्षिण को मुआवजा दें, लेकिन शर्त के साथ: अर्थशास्त्री
शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल ग्रीनस्टोन का कहना है कि विकासशील देशों को जलवायु नुकसान के लिए वित्तीय सहायता तभी मिलनी चाहिए जब वे कार्बन मूल्य निर्धारण प्रणाली अपनाएं। समझौते के विस्तृत पैरामीटर पर बातचीत की आवश्यकता होगी।
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शिकागो विश्वविद्यालय के शीर्ष ऊर्जा नीति विशेषज्ञ माइकल ग्रीनस्टोन का कहना है कि विकसित राष्ट्रों को जलवायु परिवर्तन से होने वाली क्षति के लिए वैश्विक दक्षिण को मुआवजा प्रदान करना चाहिए, लेकिन यह शर्त के साथ होना चाहिए कि प्राप्तकर्ता देश कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र लागू करें।
ग्रीनस्टोन के अनुसार, जलवायु वित्त की शर्तें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परस्पर सहमति के माध्यम से तैयार की जानी चाहिए। इस तरह की व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े वित्तीय सहायता का लाभ वास्तविक पर्यावरणीय हित में मिले और देशों को अपनी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने के लिए प्रेरित किया जा सके।
कार्बन मूल्य निर्धारण प्रणाली को अपनाने से विकासशील देशों में उत्सर्जन में कमी आएगी और दीर्घकालीन जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह दृष्टिकोण वैश्विक जलवायु कार्यवाही में जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों को प्रोत्साहित करता है।
वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु क्षति मुआवजे के विषय पर सक्रिय चर्चा चल रही है। ग्रीनस्टोन का यह प्रस्ताव उन व्यावहारिक तरीकों को रेखांकित करता है जिनसे वैश्विक जलवायु वित्त को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है।