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कोयला गैसीकरण से 5-7 साल में 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचेगी
कोल मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा है कि कोयला गैसीकरण परियोजनाएं आयात प्रतिस्थापन के माध्यम से अगले पांच से सात वर्षों में भारत को लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत कर सकती हैं। सरकार ने इन परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए दो योजनाओं के तहत 46,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की प्रतिबद्धता दी है।
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दक्षिण गोवा में खान और कोयला क्षेत्र में सुधारों पर आयोजित चौथे खनन मंत्रियों सम्मेलन को संबोधित करते हुए कोल मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने बताया कि कोयला गैसीकरण से भारत के आयात में काफी कमी आ सकती है।
विक्रम देव दत्त ने कहा कि कोयला गैसीकरण तकनीक, जो कोयले को सिंथेटिक गैस (सिनगैस) में परिवर्तित करती है, भारत द्वारा बड़ी मात्रा में आयात की जाने वाली कई उत्पादों के निर्माण में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि यदि कोयला गैसीकरण परियोजनाएं शुरू हों और बड़े पैमाने पर विकसित हों, तो आने वाले पांच से सात वर्षों में इस आयात प्रतिस्थापन के माध्यम से संभवतः 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत की जा सकती है।
सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दो प्रमुख योजनाओं के तहत कुल 46,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। दत्त ने जिम्मेदार खनन के लिए "अंतरात्मा के साथ खनन" को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने पर जोर दिया।
यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कोयला गैसीकरण तकनीक का उपयोग करके भारत विभिन्न रासायनिक और ईंधन आधारित उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ा सकता है।