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कोल इंडिया का राजस्व बोझ बढ़ा, राज्य करों से ₹7,000 करोड़ का अतिरिक्त दबाव
कोल इंडिया लिमिटेड को वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य स्तरीय सांविधिक करों में 32,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करना पड़ा। कंपनी के अध्यक्ष बी साईराम ने स्थिर और पूर्वानुमानित कर ढांचे की मांग की है।
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कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के प्रबंध निदेशक बी साईराम ने गत वित्त वर्ष में राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए करों का बोझ बढ़ने की चिंता व्यक्त की है। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभिन्न राज्य स्तरीय सांविधिक लेवी के तहत 32,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया।
साईराम ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार राज्य करों में 7,000 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि कंपनी के परिचालन लागत को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर रही है। विभिन्न राज्यों में खदान संचालन, पर्यावरण संरक्षण शुल्क और अन्य वैधानिक देयताएं इस व्यय का मुख्य कारण हैं।
कोल इंडिया के शीर्ष अधिकारी ने सरकार से एक स्थिर और पूर्वानुमानित कर नीति अपनाने की अपील की है। साईराम के अनुसार, राज्य स्तर पर करों में बार-बार और अप्रत्याशित बदलाव कंपनी की वित्तीय योजना को जटिल बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सुसंगत कराधान नीति से कंपनी अपने विकास कार्यक्रमों पर बेहतर ध्यान दे सकेगी।
सीआईएल देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कंपनी की राजस्व स्थिरता और विकास के लिए एक सुपूर्वानुमानित कर ढांचा आवश्यक है, जो विभिन्न हितधारकों के लिए लाभकारी होगा।