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तटीय वनों का संकट: 36 साल में 21% वन क्षेत्र का ह्रास
उत्तरी अमेरिका के तटीय इलाकों में समुद्र के बढ़ते जलस्तर और नमकीनता के कारण वन तेजी से विलुप्त हो रहे हैं। पिछले तीन दशकों में हरे-भरे जंगल दलदली भूमि और 'भूतिया वनों' में तब्दील हो गए हैं।
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तटीय वनस्पति के विनाश की गति पिछले तीन दशकों में लगातार बढ़ी है। 1988 से 2024 के बीच अलबेमार्ले प्रायद्वीप के वन क्षेत्र में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह संकट विशेषकर 2010 के बाद से तेजी से गहराया है, जब समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और मिट्टी में नमकीनता का स्तर बढ़ने लगा।
अनुसंधान से पता चला है कि कभी हरे-भरे वन क्षेत्र अब नमक-सहिष्णु दलदल, झाड़ीदार भूमि और 'भूतिया वनों' में तब्दील हो रहे हैं। भूतिया वन वह क्षेत्र होते हैं जहां वृक्षों के मृत तने भूमि पर खड़े रहते हैं, लेकिन जीवन्त वनस्पति नष्ट हो जाती है। इस प्रक्रिया का सीधा संबंध बढ़ती समुद्री नमकीनता से है जो पेड़ों को जीवित रहने के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने वाली मिट्टी को खराब कर देती है।
चरम मौसमी घटनाओं और तूफानों की बढ़ती तीव्रता ने खारे पानी के अंतर्प्रवाह का खतरा और भी गंभीर बना दिया है। इससे तटीय वन प्रणालियां पहले से कहीं अधिक कमजोर हो गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति पूरे तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है।