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कॉकपिट में छिपा खतरा: फ्लाईडुबई हादसे से सीख
विमान दुर्घटनाओं की जांच से पता चलता है कि पायलट की मानसिक स्थिति और थकान जैसे कारक विमान सुरक्षा के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञ कॉकपिट में ऐसी छिपी समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत बताते हैं।
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हवाई दुर्घटनाओं की जांच से यह बात सामने आई है कि तकनीकी खराबी के अलावा पायलटों की शारीरिक और मानसिक स्थिति भी विमान सुरक्षा के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। कई बड़ी दुर्घटनाओं में पता चला है कि पायलटों की थकान, तनाव और निर्णय लेने की क्षमता में कमी जैसे कारक हादसों का कारण बन सकते हैं। विमान संचालन करने वाली एजेंसियों को इन मानवीय कारकों पर गहरी नजर रखनी चाहिए।
विমान चालकों की प्रशिक्षण प्रणाली और कार्य समय को लेकर अंतर्राष्ट्रीय नियमों में कठोरता लानी चाहिए। थकान से ग्रस्त पायलट गलत निर्णय ले सकते हैं जो पूरे विमान और यात्रियों के लिए घातक साबित हो सकता है। इसलिए एयरलाइंस को अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कल्याण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
विश्व के प्रमुख विमान निर्माता और एयरलाइंस अब नियमित जांच और पायलटों के मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण को अपनी सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा बना रहे हैं। भारत सहित अन्य देशों के नागरिक विमानन प्राधिकरणों को भी ऐसी प्रणालियां स्थापित करनी चाहिए जो कॉकपिट में किसी भी संभावित खतरे को पहचान सकें।