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कॉलेजियम को राजनीतिक दबाव से अलग रखना कल्पना: पूर्व न्यायाधीश
सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजय कौल ने कहा कि न्यायपालिका को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना महज एक कल्पना है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा कॉलेजियम प्रणाली के प्रति बरकरार असंतोष पर प्रकाश डाला।
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सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजय कौल ने शीर्ष अदालत की न्यायिक नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दबाव की वास्तविकता को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि यह सोचना भ्रामक होगा कि कॉलेजियम व्यवस्था को राजनीतिक दखल से पूरी तरह अलग रखा जा सकता है। न्यायाधीश कौल ने राजनीतिक प्रतिष्ठानों के साथ सुप्रीम कोर्ट के संबंधों में गहरे तनाव की ओर संकेत किया।
न्यायाधीश कौल के अनुसार, सरकार द्वारा न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) के प्रति बरकरार असंतोष इसी तनाव की जड़ में है। अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एनजेएसी को निरस्त करने के बाद राजनीतिक व्यवस्था इस फैसले के साथ तालमेल बैठाने में असफल रही है। इस ऐतिहासिक निर्णय को लेकर शीर्ष अदालत और कार्यपालिका के बीच मतभेद बना हुआ है।
न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखने के प्रश्न पर न्यायाधीश कौल के विचार भारतीय न्यायपालिका की स्वायत्तता से संबंधित व्यापक वाद-विवाद में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि कॉलेजियम प्रणाली के तहत भी पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे बने हुए हैं। इसके साथ ही, राजनीतिक प्रभाव की चुनौतियां न्यायाधीश नियुक्तियों की प्रक्रिया को जटिल बनाती रहती हैं।