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वनाधिकार कानून से ग्राम सभा को मजबूत करने की संभावना: आदिवासी मंत्रालय
केंद्रीय आदिवासी कार्य सचिव रंजना चोपड़ा ने बेंगलुरु में वनाधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन पर क्षेत्रीय सम्मेलन में कहा कि सामुदायिक अधिकार ग्राम सभा के नेतृत्व वाले वन प्रशासन को मजबूत कर सकते हैं। यह टिप्पणी आदिवासी मंत्रालय के विवादास्पद कार्यालय ज्ञापन के बाद आई है।
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बेंगलुरु में आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में आदिवासी कार्य सचिव रंजना चोपड़ा ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत सामुदायिक अधिकार ग्राम सभा-केंद्रित वन शासन को सुदृढ़ करने की संभावना रखते हैं। उन्होंने अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर दिया।
सचिव की टिप्पणी आदिवासी मंत्रालय के एक विवादास्पद कार्यालय ज्ञापन के कुछ दिन बाद आई है। इस ज्ञापन में दावा किया गया था कि वनाधिकार अधिनियम में वन भूमि के हस्तांतरण के लिए ग्राम सभा की सहमति का कोई प्रावधान नहीं है। यह बयान विपक्षी नेताओं, आदिवासी संगठनों और वनवासी अधिकार समूहों से तीव्र आलोचना का कारण बना।
वन अधिकार अधिनियम आदिवासी समुदायों और वन निवासियों को वन संसाधनों पर अधिकार प्रदान करता है। अधिनियम की प्रभावशीलता पर इस तरह की टिप्पणियां वन शासन और सामुदायिक भागीदारी के बारे में चल रही बहस को परिलक्षित करती हैं।
मंत्रालय की ओर से आए विभिन्न बयानों से वन भूमि के उपयोग और ग्राम सभा की भूमिका को लेकर नीति में स्पष्टता की कमी दिखाई दे रही है। सचिव के वर्तमान बयान से इस अस्पष्टता को दूर करने का प्रयास दिखता है।