Business · India Bureau
भारतीय दवा संयंत्रों में नियमितता जांच से बैच रिलीज में देरी
एक हालिया सर्वेक्षण में पाया गया है कि निर्माण संबंधी घटनाओं की जांच छह महीने तक खिंच जाती है, जिससे दवा बैच की रिलीज में विलंब होता है और फार्मास्यूटिकल संयंत्रों की उत्पादकता प्रभावित होती है।
LSN India ·

भारतीय दवा उद्योग को एक गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि नियामक अनुपालन संबंधी कार्यों की बैकलॉग फार्मास्यूटिकल संयंत्रों पर दबाव बढ़ा रहा है। एक विस्तृत सर्वेक्षण के अनुसार, निर्माण प्रक्रिया में होने वाली घटनाओं की जांच और समाधान में छह महीने तक का समय लग सकता है, जो दवा बैच जारी करने में महत्वपूर्ण देरी का कारण बनता है।
इस विलंब के कारण दवा निर्माताओं की उत्पादक क्षमता में कमी आई है। जांच प्रक्रिया में लगने वाला लंबा समय न केवल बिक्री को प्रभावित करता है, बल्कि कार्यशील पूंजी के प्रवाह को भी रोकता है। संयंत्रों में विभिन्न चरणों में अटके दवा बैच कंपनियों के लिए वित्तीय बोझ बनते हैं।
इस समस्या के समाधान के लिए नियामक प्राधिकरणों और फार्मास्यूटिकल कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। जांच प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और समयसीमा निर्धारित करने से उद्योग की दक्षता में सुधार हो सकता है।
भारतीय दवा उद्योग विश्व बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसी में निर्माण प्रक्रिया में आने वाली रुकावटें न केवल घरेलू बाजार को प्रभावित करती हैं, बल्कि भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी प्रभावित कर सकती हैं।