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एशिया में युद्ध और चरम मौसम से खाद्य सुरक्षा को खतरा
ईरान संकट से ईंधन और उर्वरक की आपूर्ति में बाधा आई है जबकि एल नीनो से जुड़े चरम मौसम ने फसलों को प्रभावित किया है। इससे एशिया के कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा है।
LSN India ·

एशिया के कई देशों की खाद्य सुरक्षा पर दोहरी चुनौती का सामना हो रहा है। भू-राजनीतिक तनाव से ईंधन और उर्वरक के आयात में व्यवधान आया है जबकि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चरम मौसमी घटनाएं कृषि उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं।
ईरान से संबंधित संकट ने वैश्विक ऊर्जा और कृषि इनपुट की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। उर्वरक की कीमतें बढ़ी हैं और ईंधन की उपलब्धता सीमित हुई है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है। यह स्थिति विशेषकर उन एशियाई देशों के लिए गंभीर है जो आयातित खाद्य पदार्थों और कृषि इनपुट पर निर्भर हैं।
एल नीनो घटना से जुड़ी असामान्य मौसमी परिस्थितियां समस्या को और गंभीर बना रही हैं। सूखा, बाढ़ और अप्रत्याशित तापमान में उतार-चढ़ाव से प्रमुख फसलों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप खाद्य पदार्थों की उपलब्धता में कमी आई है।
विश्लेषकों के अनुसार, ये कारक मिलकर एशिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि कर सकते हैं। कृषि-निर्भर समुदाय और निम्न आय वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इस परिस्थिति में सरकारों को खाद्य आपूर्ति को स्थिर रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है।