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कांग्रेस-तृणमूल: विरोध से मैत्री तक का 28 साल का सफर

1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। अब दोनों दल एक बार फिर करीब आने की ओर बढ़ रहे हैं।

LSN India · 19 September 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है जहां दो दशक पहले आमने-सामने खड़े दल फिर से एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1998 में ममता बनर्जी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विरुद्ध विद्रोह के रूप में की थी क्योंकि उस समय कांग्रेस वामपंथी गठबंधन का मुकाबला नहीं कर सकी थी।

गत दो दशकों में राजनीतिक परिस्थितियों में भारी बदलाव देखा गया है। तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी बन गई, जबकि कांग्रेस का प्रभाव क्षेत्रीय स्तर पर कमजोर होता गया। इसी बीच राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए जिन्होंने विभिन्न राजनीतिक गठजोड़ों को पुनर्परिभाषित किया।

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में दोनों पार्टियों के बीच सहयोग की संभावनाएं बढ़ी हैं। साझा राजनीतिक लक्ष्यों और केंद्रीय सत्ता के प्रति समान चिंताओं ने इन दलों को एक-दूसरे के निकट लाया है। यह विकास भारतीय राजनीति के गतिशील स्वरूप को दर्शाता है जहां आवश्यकता के अनुसार गठबंधन का पुनर्गठन होता रहता है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस समीपन से पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं। संभावित सहयोग के इस चरण को देश की राजनीतिक गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है।