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वंदे मातरम विवाद: 1937 का कांग्रेस संकल्प क्या था
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि 1937 के अपने संकल्प में केवल वंदे मातरम के पहले दो श्लोकों को राष्ट्रीय समारोहों में गाने की सिफारिश की गई थी। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रस्ताव स्वतंत्रता संग्राम के कई प्रमुख नेताओं के विचारों को दर्शाता है।
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वंदे मातरम गीत को लेकर छिड़े विवाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपना ऐतिहासिक पक्ष रखा है। पार्टी का कहना है कि 1937 में लिया गया उसका संकल्प एक सुविचारित निर्णय था जो आंदोलन के दौरान प्रभावशाली नेताओं की सहमति पर आधारित था।
1937 के इस संकल्प में कांग्रेस ने सार्वजनिक और राष्ट्रीय आयोजनों में वंदे मातरम गीत के केवल पहले दो श्लोकों को गाने की अनुशंसा की थी। इस निर्णय के पीछे का विचार धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए एक सर्वमान्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करना था।
कांग्रेस के अनुसार, यह प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक कदम नहीं था, बल्कि यह स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न धाराओं को एक साथ लाने का प्रयास था। उस समय के प्रमुख नेताओं ने माना था कि इस तरह का दृष्टिकोण राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
पार्टी का तर्क है कि यह ऐतिहासिक संकल्प समावेशिता और सद्भावना के सिद्धांत पर आधारित था, जो आजादी की लड़ाई के मूल मूल्यों से जुड़ा था। कांग्रेस इस निर्णय को राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानती है।