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नागांव लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस की वापसी की परीक्षा
कांग्रेस ने 2019 में भाजपा से नागांव सीट जीती थी, लेकिन अपने दोबारा विजयी सांसद ने 2026 में भाजपा में शामिल होकर पार्टी को झटका दिया है। अब इस महत्वपूर्ण असम सीट पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस की राजनीतिक मजबूती का परीक्षण होगा।
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असम के नागांव लोकसभा क्षेत्र में आने वाले उपचुनाव कांग्रेस पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित होने वाला है। 2019 के आम चुनावों में कांग्रेस ने इस प्रभावशाली सीट को भाजपा से अपने कब्जे में ले लिया था और पार्टी की मजबूत उपस्थिति स्थापित की थी।
हालांकि, हाल के घटनाक्रमों में एक बड़ा राजनीतिक उथल-पुथल देखा गया। नागांव से कांग्रेस के दोबारा चुने गए सांसद ने 2026 में भाजपा में अपनी सदस्यता स्थानांतरित कर दी। इस कदम ने कांग्रेस को एक गंभीर झटका दिया है और सीट पर होने वाले उपचुनाव को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
नागांव एक मुख्य क्षेत्र रहा है जहां कांग्रेस को क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त है। इस उपचुनाव के परिणाम न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित करेंगे, बल्कि असम में कांग्रेस की भविष्य की रणनीति को भी निर्धारित करेंगे।
कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह सीट पुनः हासिल करना अत्यंत आवश्यक है ताकि पार्टी अपनी खोई हुई साख को बहाल कर सके और क्षेत्र में अपनी राजनीतिक मजबूती को प्रदर्शित कर सके। आने वाले सप्ताहों में चुनाव प्रचार का माहौल तेज हो जाएगा और दोनों प्रमुख पार्टियां इस सीट को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झलकाएंगी।