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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में अधिकारियों की शक्तियों पर कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस दल ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्य सचिव और कानून सचिव के पत्रों पर चर्चा की मांग की है। इसी बीच, राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाले प्रस्ताव के विरोध में भाजपा विधायकों ने सदन से वाकआउट किया।
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जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में कांग्रेस दल ने सरकारी अधिकारियों की व्यापक शक्तियों पर सवाल खड़े करते हुए एक महत्वपूर्ण विषय उठाया है। पार्टी के विधायकों ने मुख्य सचिव और कानून सचिव द्वारा जारी किए गए पत्रों की विधानसभा में विस्तृत चर्चा की मांग की है, जिसमें प्रशासनिक सीमा से परे कार्रवाई के बारे में चिंता व्यक्त की गई है।
कांग्रेस का मानना है कि इन पत्रों के माध्यम से नौकरशाही को अत्यधिक शक्तियां दी जा रही हैं, जो संवैधानिक ढांचे के अनुरूप नहीं हैं। विधायकों का तर्क है कि सरकारी कर्मचारियों को निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के समान स्तर की शक्तियां नहीं दी जानी चाहिए।
दूसरी ओर, विधानसभा में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया था। इस प्रस्तावना में भारत सरकार से तुरंत और बिना किसी देरी के राज्य का दर्जा लौटाने का आह्वान किया गया है।
इस प्रस्ताव के विरोध में भाजपा के विधायकों ने सदन से वाकआउट कर दिया। भाजपा का मानना है कि यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ है और इसलिए इसे समर्थन नहीं दिया जा सकता।