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न्यायाधीश नियुक्तियों में सरकारी मंजूरी पहले? कांग्रेस का भाजपा पर हमला
पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के दावे को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने भाजपा पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।
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न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के हालिया दावे ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। उनके अनुसार, उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति से पहले सरकार की मंजूरी लेना एक प्रथा बन गई है। इस दावे के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस के नेताओं ने कहा है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति संवैधानिक नियमों के तहत होनी चाहिए, न कि किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के अंतर्गत। उनका मानना है कि यदि सरकार न्यायिक निर्णयों में प्रभाव डालने लगे तो लोकतंत्र के मूल सिद्धांत को नुकसान होगा। पार्टी ने इस मामले में स्पष्टीकरण और जांच की मांग की है।
भारतीय संविधान में न्यायपालिका को कार्यपालिका से स्वतंत्र माना गया है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा संचालित किया जाता है। यह मामला न्यायिक स्वतंत्रता की एक गंभीर चिंता को उजागर करता है।