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कांग्रेस पेशेवरों को चाहती है, पर उनकी बातें सुन पाएगी?
थारूर से लेकर चक्रवर्ती और अब यास्की तक, 2017 से शुरू हुए कांग्रेस के इस प्रयोग की कहानी पार्टी की असली नीयत को बयां करती है।
LSN India ·
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी पार्टी में प्रतिष्ठित पेशेवर और बुद्धिजीवियों को शामिल करने की कोशिश की है। शशि थारूर, प्रभात रंजन झा और अब यास्की देसाई जैसे नाम इसी दिशा में पार्टी के प्रयासों का प्रतीक माने जाते हैं। ये सभी आंकड़े विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के लिए जाने जाते हैं।
2017 से शुरू हुए इस प्रयोग ने कांग्रेस को नई बौद्धिक ऊर्जा देने का वादा किया था। हालांकि, इन पेशेवरों का पार्टी के भीतर सफर हमेशा सुचारू नहीं रहा है। कई बार इनके विचार और सार्वजनिक बयानों को लेकर पार्टी के नेतृत्व के साथ मतभेद देखने को मिले हैं।
कांग्रेस जहां एक ओर ऐसे प्रतिभाशाली लोगों को पार्टी में लाने का प्रयास कर रही है, वहीं उनकी स्वतंत्र सोच और राय को पार्टी की अनुशासनात्मक नीतियों के साथ समायोजित करना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ है। यह सवाल उठता है कि क्या पार्टी वास्तव में ऐसे सशक्त व्यक्तित्वों के विचारों को स्वीकार करने के लिए तैयार है।
इस प्रयोग की सफलता या विफलता इस बात पर निर्भर करती है कि कांग्रेस कितनी लचीली रहती है और अपने सदस्यों की बौद्धिक स्वतंत्रता को कितना महत्व देती है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि पार्टी पेशेवरों की प्रतिभा का सही तरीके से उपयोग कर पाएगी या यह प्रयोग भी पहले के सभी प्रयासों की तरह अधूरा रह जाएगा।