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मतदाता पहचान से कल्याण योजनाओं को जोड़ने पर कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस का आरोप है कि आधार की जगह मतदाता पहचान पत्र को कल्याण योजनाओं के लिए अनिवार्य करने से लाभार्थियों का बड़े पैमाने पर बहिष्कार हो सकता है। पार्टी ने इसे नागरिकों के अधिकारों की चोरी बताया है।
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राजनीतिक विरोध का एक नया मोर्चा खुल गया है जब कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग की मतदाता पहचान पत्र को सामाजिक कल्याण योजनाओं से जोड़ने की संभावित योजना के खिलाफ आवाज उठाई है। पार्टी के महासचिव संचार जयराम रमेश ने कहा है कि वर्तमान में आधार आधारित लाभार्थी पहचान प्रणाली को मतदाता पहचान से बदलने के कदम से देश भर में बड़े पैमाने पर गरीबों का बहिष्कार हो सकता है।
कांग्रेस का तर्क है कि आधार प्रणाली के बावजूद लाखों नागरिक पहचान दस्तावेजों से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में मतदाता पहचान को अनिवार्य करना इस समस्या को और गंभीर बना सकता है। पार्टी के अनुसार, जो लोग विभिन्न कारणों से मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं हैं या जिनके दस्तावेजों में त्रुटियां हैं, वे सामाजिक लाभों से महरूम रह जाएंगे।
जयराम रमेश ने इस प्रस्तावित परिवर्तन को 'हक-हकूक की चोरी' कहते हुए इसकी तीव्र आलोचना की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसी नीति समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को और भी पीछे छोड़ देगी।
कांग्रेस का यह बयान तब आया है जब सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पहचान प्रणालियों को सुव्यवस्थित करने की दिशा में काम कर रही है। पार्टी ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है और कहा है कि किसी भी नीति परिवर्तन से पहले प्रभावित आबादी से व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए।