LSN News › India

Politics · India Bureau

अरावली संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट समिति को अपर्याप्त जनसंवाद की चिंता

पर्यावरणविदों ने अरावली पहाड़ियों के संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की समिति को पत्र लिखकर परामर्श प्रक्रिया को व्यापक बनाने की मांग की है। ३१ अगस्त की समय सीमा से पहले विशेषज्ञों का आग्रह है कि ग्रामीण और आदिवासी समुदायों की आवाजें भी सुनी जाएं।

LSN India · 25 August 2026

अरावली संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट समिति को अपर्याप्त जनसंवाद की चिंता

अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति पर पर्यावरण संरक्षणकर्ताओं ने जनसंवाद प्रक्रिया को अपर्याप्त बताया है। समिति को दिए गए पत्रों में विशेषज्ञों ने तर्क दिया है कि वर्तमान परामर्श प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सीमित है।

पर्यावरणविदों की मांग है कि समिति को ३१ अगस्त की निर्धारित समय सीमा बढ़ानी चाहिए ताकि सभी हितधारकों से विस्तृत विचार-विमर्श किया जा सके। उनका कहना है कि ग्रामीण इलाकों और आदिवासी बहुल क्षेत्रों की आवाजें सुनना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि अरावली का संरक्षण इन समुदायों के जीवन से सीधे जुड़ा है।

संरक्षणकर्ताओं ने समिति से स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करने और क्षेत्र के ज्ञानी स्थानीय नागरिकों को फील्ड दौरों में शामिल करने की अपील की है। उनका विचार है कि पहाड़ियों के संरक्षण संबंधी नीतियां तभी प्रभावी हो सकती हैं जब सभी पक्षों की जानकारी और सहमति हो।

अरावली पर्वत श्रृंखला, जो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली है, वर्षों से खनन और शहरी विकास के दबाव में है। इसके पारिस्थितिक महत्व को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की समिति इसके संरक्षण पर सुझाव दे रही है।