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बोर्ड नेतृत्व परिवर्तन की योजना में क्यों विफल हो रहे हैं
कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स उत्तराधिकार की रणनीतिक योजना में गंभीर खामियां दिखा रहे हैं। अक्सर केवल मुख्य कार्यकारी अधिकारी ही उत्तराधिकार की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं, जिससे संगठन में मजबूत नेतृत्व विकल्पों का विकास नहीं हो पाता।
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भारतीय और दक्षिण एशियाई कंपनियों के बोर्ड्स में उत्तराधिकार योजना की कमी एक बढ़ती हुई समस्या बन गई है। प्रशासनिक संरचना में यह खामी संगठनों के भविष्य के नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता पैदा कर रही है। अधिकांश मामलों में, केवल वर्तमान सीईओ ही उत्तराधिकार से संबंधित निर्णय लेते हैं, जिससे बोर्ड की सामूहिक जिम्मेदारी कमजोर पड़ जाती है। यह दृष्टिकोण पारदर्शिता और संस्थागत शासन की बुनियादी नीतियों के विरुद्ध है। इस प्रक्रिया में बोर्ड के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी और पेशेवर निरीक्षण का अभाव स्पष्ट दिखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत उत्तराधिकार योजना के लिए बोर्ड को प्रतिभा पहचान, विकास और मूल्यांकन में प्रत्यक्ष भूमिका निभानी चाहिए। वर्तमान प्रणाली में आंतरिक प्रतिभा को बढ़ावा देने के बजाय, केवल शीर्ष नेतृत्व के हितों को ध्यान में रखा जाता है। इस संरचनात्मक खामी से कंपनियों का दीर्घकालिक विकास और स्थिरता प्रभावित होती है। विकसित देशों में बोर्ड-स्तरीय उत्तराधिकार योजना को अधिक महत्व दिया जाता है, जो भारतीय कंपनियों के लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।