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तीसरी भाषा की जगह कृत्रिम बुद्धिमत्ता न लें: परिषद सदस्य
शिक्षा परिषद के सदस्यों ने तीसरी भाषा की शिक्षा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्रतिस्थापित करने के विरुद्ध चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि भाषा सीखना सांस्कृतिक और संज्ञानात्मक विकास के लिए आवश्यक है।
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शिक्षा नीति निर्माताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक में परिषद सदस्यों ने जोर देकर कहा है कि विद्यालयों में तीसरी भाषा के पाठ्यक्रम को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल समाधानों से प्रतिस्थापित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि भाषा शिक्षा केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकीकरण का महत्वपूर्ण अंग है।
परिषद सदस्यों के अनुसार, तीसरी भाषा सीखने से छात्रों के संज्ञानात्मक कौशल में वृद्धि होती है और उनमें विविध संस्कृतियों को समझने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल भाषा अनुवाद या सूचना प्रदान कर सकती है, लेकिन यह वास्तविक भाषा ज्ञान और सांस्कृतिक संवेदनशीलता प्रदान नहीं कर सकती।
शिक्षा विशेषज्ञों ने जोर दिया कि विद्यालय पाठ्यक्रम में भाषा शिक्षा को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का उपयोग भाषा शिक्षण में सहायक उपकरण के रूप में किया जा सकता है, लेकिन इसे प्रत्यक्ष शिक्षा का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए। परिषद ने सरकार से भाषा शिक्षकों के प्रशिक्षण और संसाधनों में निवेश बढ़ाने की अपील की है।