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नकली दवाओं की खाकामी में तुर्की से फाइजर लेबल आयात का खुलासा
कर्नाटक स्थित एक पूर्व चिकित्सा प्रतिनिधि द्वारा संचालित नकली दवा रैकेट की जांच में विशेष दल को तुर्की से अंतरराष्ट्रीय कड़ियां मिली हैं। प्रकरण में तस्करी की गई दवाओं को पैकेज करने के लिए मूल फाइजर लेबल की आपूर्ति विदेश से की जा रही थी।
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कर्नाटक में नकली दवाओं के एक बड़े कारोबार की जांच कर रहा विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अवैध नेटवर्क के विस्तार का पता लगाया है। जांच से पता चला है कि इस रैकेट के संचालकों ने तुर्की से असली फाइजर लेबल आयात किए थे, जिनका उपयोग नकली दवाओं की पैकेजिंग में किया जाता था। यह रणनीति नकली दवाओं को वैध उत्पाद का रूप देकर बाजार में प्रवेश कराने के लिए अपनाई गई थी।
एसआईटी की गहन जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क केवल भारतीय स्तर पर सक्रिय नहीं था, बल्कि विदेशों में भी इसके संपर्क थे। रैकेट के प्रमुख, जो एक पूर्व चिकित्सा प्रतिनिधि हैं, के खिलाफ इस अवैध कारोबार में संगठित तरीके से काम करने का आरोप लगाया गया है। जांच दल को तुर्की में इस आपूर्ति श्रृंखला के मुख्य कड़ियों की पहचान करने में सफलता मिली है।
यह मामला भारत में नकली दवाओं की गंभीर समस्या को उजागर करता है और यह दर्शाता है कि अवैध दवा कारोबार किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। अधिकारी इस मामले में आगे की जानकारी हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के लिए संबंधित एजेंसियों से संपर्क स्थापित कर रहे हैं।