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कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर राष्ट्रों को अपना रास्ता चुनना चाहिए: जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कहना है कि देशों को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना चाहिए। भारत इस तकनीक को ग्लोबल साउथ के साथ अपनी साझेदारी का अभिन्न अंग बना रहा है।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि प्रत्येक राष्ट्र को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास में अपना स्वतंत्र मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि यह तकनीकी ढांचा प्रत्येक देश की विशिष्ट आवश्यकताओं और लक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।
जयशंकर के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल विकसित राष्ट्रों का विशेषाधिकार नहीं हो सकती। विकासशील देशों को भी इस तकनीकी क्रांति में समान भागीदारी और नियंत्रण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। भारत इस दृष्टिकोण को ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अपनी साझेदारी में प्रतिबिंबित कर रहा है।
भारतीय विदेश मंत्री का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब विश्व भर में एआई के नियमन और विकास को लेकर व्यापक बहस चल रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि तकनीकी प्रगति के लाभ सभी राष्ट्रों तक पहुंचने चाहिए, न कि केवल कुछ शक्तिशाली देशों तक सीमित रहने चाहिए।
भारत के इस रुख को ग्लोबल साउथ देशों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। जयशंकर ने कहा कि भारत अपने साथी विकासशील देशों के साथ मिलकर एक समावेशी एआई पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के प्रति प्रतिबद्ध है जो स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करे।