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बाबा रामदेव के सहायक बालकृष्णन को नकली दस्तावेज मामले में बरी किया गया
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) की अदालत ने 15 साल पुराने नकली दस्तावेज मामले में बालकृष्णन को आरोपमुक्त कर दिया है। सह-आरोपी नरेश चंद्र द्विवेदी को भी अदालत ने बरी कर दिया है।
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भारतीय न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण फैसले में, विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) की अदालत ने योग आचार्य बाबा रामदेव के सहायक बालकृष्णन को एक पुराने नकली दस्तावेज मामले में दोषमुक्त कर दिया है। यह मामला डेढ़ दशक पहले दर्ज किया गया था।
अदालत के इसी फैसले में सह-आरोपी नरेश चंद्र द्विवेदी को भी बरी किया गया है। द्विवेदी पर बालकृष्णन को नकली दस्तावेज प्रदान करने का आरोप लगाया गया था। दोनों ही आरोपियों के खिलाफ सबूत पर्याप्त नहीं पाए जाने के कारण उन्हें आरोप मुक्त किया गया।
यह निर्णय लंबे समय से विवादास्पद रहे इस मामले में एक अंतिम विराम लगाता है। बालकृष्णन पतंजलि योगपीठ के प्रबंध निदेशक और बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में सबूत के महत्व को रेखांकित करता है।
अदालत का यह निर्णय आने से पहले मामले में कई सुनवाइयां हुई थीं। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों को साबित करने में असफल रहना पड़ा।