World · India Bureau
आंदोलन रोकना कोर्ट का काम नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल मामले में स्पष्ट कहा है कि सार्वजनिक प्रदर्शन को रोकना न्यायालय का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए।
LSN India ·

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर जरांगे की भूख हड़ताल को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। न्यायालय ने कहा कि नागरिकों को आंदोलन करने का अधिकार है और किसी कार्यकर्ता के प्रदर्शन को रोकना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस तरह की संवेदनशील स्थितियों में महाराष्ट्र सरकार को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और मुद्दे के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। न्यायालय का यह रुख नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा को प्रतिबिंबित करता है।
जरांगे का आंदोलन मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर चल रहा है। इस मामले पर पिछले कुछ महीनों में काफी राजनीतिक और सामाजिक बहस हुई है। कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो जाता है कि विधिक मंच ऐसे मामलों में सीधी भूमिका नहीं निभाता, बल्कि सरकार को ही समाधान खोजने की जिम्मेदारी दी है।