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बलात्कार मामले में पूर्व विधायक नरेंद्र पवार को अंतरिम सुरक्षा से वंचित
अदालत ने कहा कि पवार के खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं। अंतरिम राहत देने से पहले अदालत ने जांचकर्ता अधिकारी और शिकायतकर्ता की सुनवाई जरूरी बताई है।
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पूर्व विधायक नरेंद्र पवार को बलात्कार के आरोपों में अंतरिम सुरक्षा देने से अदालत ने इनकार कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पवार के खिलाफ लगे आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं जिन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता।
न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि किसी भी अंतरिम राहत पर विचार करने से पहले अदालत को जांच अधिकारी और शिकायतकर्ता दोनों की बातें सुनना आवश्यक है। अदालत का मानना है कि मामले के सभी पक्षों को समान रूप से सुना जाना चाहिए और सभी तथ्य सामने आने चाहिए।
यह फैसला पवार की ओर से दायर अंतरिम संरक्षण की याचिका के बाद आया है। पवार का कानूनी दल मामले को चुनौती देता रहा है, लेकिन अदालत ने अभी के लिए किसी तरह की सुरक्षा देने के लिए अपनी असहमति व्यक्त की है।
आगामी सुनवाई में अदालत जांच दल और शिकायतकर्ता की विस्तृत जानकारी लेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अदालतें आमतौर पर बेहद सावधानी से निर्णय लेती हैं और सभी पक्षों को पूर्ण सुनवाई का अवसर देती हैं।