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26/11 हमलावर कसाब की उम्र को लेकर अदालत में झूठ का खुलासा
2009 में मुंबई आतंकवादी हमलों के आरोपी अजमल कसाब की उम्र को लेकर बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए सवाल को अदालत ने खारिज कर दिया था। कसाब के वकील द्वारा दी गई नाबालिगता की दलील को न्यायिक जांच में असत्य साबित किया गया था।
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26/11 के आतंकवादी हमलों के आरोपी अजमल कसाब की उम्र को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठा था जिसे अदालत ने निर्णायक रूप से सुलझाया। 2009 में जब इस केस की सुनवाई शुरू हुई, तो कसाब के वकील अब्बास काजमी ने अदालत में दावा किया कि उनके मुवक्किल उस समय नाबालिग थे जब 26/11 के हमले किए गए थे।
बचाव पक्ष ने इस दलील के आधार पर मामले को जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की थी। नाबालिग होने की स्थिति में कसाब को भारतीय कानून के तहत अलग किस्म की सजा दी जानी संभव थी।
हालांकि, अदालत की जांच में कसाब की नाबालिगता का दावा गलत साबित हुआ। अदालती कार्यवाहियों के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि कसाब उस समय 21 साल का था जब उसने 2008 के हमलों में भाग लिया था। अदालत ने बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत आयु संबंधी सभी दस्तावेजों की समीक्षा के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंची।
यह मामला न केवल न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण था बल्कि यह दर्शाता था कि कैसे कानूनी प्रक्रिया में तथ्यों की सत्यता की कठोर जांच की जाती है। अदालत ने अपने निर्णय में इस बात को रेखांकित किया कि सजा के साथ न्याय की बुनियाद सच्चाई पर ही टिकी होती है।