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पिता ने भ्रम में चारों बेटियों को वसीयत से निकाला, अदालत ने रद्द किया
एक अदालत ने पिता की वसीयत को रद्द कर दिया जिसमें उन्होंने भ्रामक विचारों के कारण अपनी चारों बेटियों को 10 लाख पाउंड की संपत्ति से वंचित करने की कोशिश की थी। अदालत ने माना कि पिता की मानसिक स्थिति वसीयत बनाते समय समुचित नहीं थी।
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एक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पिता द्वारा बनाई गई वसीयत को निरस्त कर दिया है। मामला उस स्थिति में सामने आया जब एक पिता ने अपनी चारों बेटियों को लगभग 10 लाख पाउंड की विशाल संपत्ति से वंचित करने का प्रयास किया। अदालत ने पाया कि इस कार्रवाई के पीछे पिता के मन में भ्रामक और तर्कहीन विचार थे। न्यायाधीशों ने यह भी निर्धारित किया कि वसीयत बनाते समय पिता की मानसिक क्षमता संदिग्ध थी। इसके आधार पर अदालत ने वसीयत को पूरी तरह से अमान्य घोषित कर दिया। यह निर्णय परिवार कानून में एक महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित करता है जहां न्यायालय वसीयतकर्ता की मानसिक स्थिति की जांच करते हैं। बेटियों की कानूनी टीम ने तर्क दिया कि उनके पिता भ्रम की स्थिति में थे जो उन्होंने स्वेच्छा से वसीयत बनाने के लिए आवश्यक सामर्थ्य को नकारती है। अदालत के इस फैसले से परिवार में संपत्ति का वितरण पारंपरिक उत्तराधिकार कानून के अनुसार होगा, जिससे सभी बेटियां समान अधिकार प्राप्त करेंगी।