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अभिमन्यु हत्या मामले में अदालत ने बंद कक्ष में सुनवाई की अपील को खारिज किया
अभिमन्यु हत्या कांड में प्रधान सत्र न्यायाधीश के.के. बालकृष्णन ने आरोपी की बंद कक्ष में मुकदमे की सुनवाई कराने की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह मामला ऐसा नहीं है जिसमें गोपनीय सुनवाई की जा सके।
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अभिमन्यु हत्या मामले में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है जब प्रधान सत्र न्यायाधीश के.के. बालकृष्णन ने आरोपी की बंद कक्ष में कार्यवाही कराने की याचिका को निरस्त कर दिया है। न्यायाधीश ने 15 सितंबर को इस याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा था और अब उन्होंने इसे खारिज कर दिया है।
न्यायालय के अनुसार यह मामला ऐसी परिस्थितियों से संबंधित नहीं है जहां कानूनी रूप से बंद कक्ष में सुनवाई की जा सकती है। न्यायाधीश का यह निर्णय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सार्वजनिक न्याय व्यवस्था के सिद्धांतों पर आधारित प्रतीत होता है।
आरोपी की ओर से यह दलील दी गई थी कि बंद कक्ष में कार्यवाही से मामले की संवेदनशील प्रकृति को ध्यान में रखते हुए सुनवाई की जा सकती है। हालांकि, न्यायाधीश ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और मामले को सामान्य तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
यह फैसला अभिमन्यु हत्या कांड में न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अदालत अब इस मामले की सुनवाई सार्वजनिक मंच पर जारी रखेगी और आगे की कार्यवाही में पारदर्शिता बनी रहेगी।