Politics · India Bureau
क्या मुस्लिम नाबालिग शादी कर सकते हैं? अदालतों का क्या कहना है
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष नाबालिग विवाह का मामला उठा है। भारतीय अदालतें इस संवेदनशील विषय पर क्या निर्णय देती रही हैं, इसे समझें।
LSN India ·

भारत में मुस्लिम निजी कानून के तहत नाबालिग विवाह का सवाल लंबे समय से विवादास्पद रहा है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष यह मुद्दा फिर से उठा है, जहां अदालत को यह तय करना है कि क्या मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत अवयस्क बच्चों की शादी वैध मानी जा सकती है।
भारतीय अदालतें इस विषय पर अपने फैसलों में सावधानी बरतती रही हैं। संविधान के मौलिक अधिकार और विभिन्न कानूनों के बीच संतुलन बनाना न्यायपालिका के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। बाल विवाह निषेध अधिनियम जैसे कानून राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।
मुस्लिम व्यक्तिगत कानून में विवाह की वैधता के लिए विशिष्ट शर्तें निर्धारित हैं। हालांकि, विभिन्न न्यायिक व्याख्याओं के कारण इस कानून का अनुप्रयोग राज्यों में भिन्न हो सकता है। अदालतें बार-बार यह कहती रही हैं कि किसी भी धार्मिक कानून को संवैधानिक प्रावधानों से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
विशेषज्ञ मानते हैं कि नाबालिग विवाह के मामलों में बच्चों के सर्वोत्तम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पिछले वर्षों में विभिन्न उच्च न्यायालयों ने कई मामलों में बाल विवाह को रद्द किया है, भले ही वह किसी धार्मिक व्यक्तिगत कानून के तहत किया गया हो। यह सवाल अभी भी कानूनी और सामाजिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है।