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विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण जरूरी: भारत के मुख्य न्यायाधीश
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि न्यायालयों को ऐसे समाधान खोजने चाहिए जो पर्यावरण की रक्षा करते हुए विकास की वैध आवश्यकताओं को भी पूरा करें।
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लंदन में राष्ट्रमंडल नीति संवाद में भाग लेते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि पर्यावरण और विकास को आवश्यक रूप से एक-दूसरे के विरोधी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मार्लबरो हाउस में राष्ट्रमंडल राष्ट्र और राष्ट्रमंडल कानूनी शिक्षा संस्था द्वारा आयोजित जलवायु न्याय पर इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में उन्होंने कहा कि अदालतें ऐसे विकल्प तलाश सकती हैं जहां दोनों के हित सुरक्षित रहें।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आधुनिक समय में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव महाद्वीपों में फैले हुए हैं और इन्हें गीगाटन कार्बन में मापा जाता है। इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ता है, जैसा कि प्राचीन काल में किसी राजा की कल्पना भी नहीं हो सकती थी। उन्होंने कहा कि यह स्मरण दिलाता है कि जलवायु संकट कानूनी श्रेणियों की सीमाओं को चुनौती देगा।
न्यायाधीश कांत जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम की चार दिनों की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उन्होंने जोर दिया कि न्यायपालिका को इन जटिल चुनौतियों के समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी और संवैधानिक मूल्यों के साथ-साथ आर्थिक प्रगति दोनों को संतुलित करना होगा।