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कालबुर्गी को सूखाग्रस्त सूची से बाहर रखने पर सीपीआई(एम) का विरोध
कर्नाटक के कालबुर्गी जिले को सूखाग्रस्त क्षेत्रों की आधिकारिक सूची से除बाहर किए जाने के खिलाफ कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने तीव्र विरोध दर्ज किया है। पार्टी का आरोप है कि इस निर्णय से क्षेत्र के किसानों को मिलने वाली राहत सहायता प्रभावित होगी।
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कालबुर्गी जिले को राज्य सरकार द्वारा जारी सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सूची से छोड़े जाने पर सीपीआई(एम) ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के अनुसार, यह निर्णय क्षेत्र के कृषि समुदाय के साथ एक गंभीर अन्याय है, जहां सूखे की स्थिति ने फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाया है।
सूखाग्रस्त सूची में शामिल न होने से कालबुर्गी के किसानों को सरकारी मुआवजा, कर्ज माफी और अन्य आपातकालीन सहायता कार्यक्रमों से वंचित रहना पड़ेगा। पार्टी का कहना है कि जिले के विभिन्न हिस्सों में वर्षा की कमी और भूजल स्तर में गिरावट स्पष्ट रूप से सूखे की परिस्थितियों को दर्शाता है।
सीपीआई(एम) ने सरकार से इस निर्णय को तुरंत पुनर्विचार करने और कालबुर्गी को सूखाग्रस्त जिलों की सूची में शामिल करने की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से किसी क्षेत्र को सहायता से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
यह विरोध उस समय आया है जब क्षेत्र के कृषकों का जीवन सूखे के दीर्घकालीन प्रभावों से जूझ रहा है। राज्य और केंद्र सरकार से सूखाग्रस्त क्षेत्रों की पुनर्मूल्यांकन की अपेक्षा की जा रही है।