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बायोमेट्रिक और वोटर आईडी को कल्याण योजनाओं से जोड़ने का सीपीआई(एम) ने विरोध किया
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने सरकारी मंत्री के प्रस्ताव को ग्रामीण गरीबों पर हमला करार दिया है और इसे वापस लेने की मांग की है। पार्टी का मानना है कि यह निर्णय समावेशी नहीं है और बहुसंख्यक लोगों को लाभों से वंचित करेगा।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने सोमवार को सरकारी मंत्री के बायोमेट्रिक डेटा और मतदाता पहचान पत्र को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के सुझाव का तीव्र विरोध किया है। पार्टी ने इस कदम को ग्रामीण आबादी के विरुद्ध एक संगठित षड्यंत्र बताया है।
सीपीआई(एम) का तर्क है कि यह प्रस्ताव भारत के संविधान में निहित समावेशी विकास के सिद्धांतों के विरुद्ध है। पार्टी का मानना है कि इस तरह की पहचान-आधारित शर्तें देश के सबसे कमजोर और सीमांत समुदायों को सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों से बाहर रखेंगी।
सीपीआई(एम) के अनुसार, लाखों गरीब नागरिकों के पास वर्तमान में समुचित बायोमेट्रिक रिकॉर्ड नहीं है, और ऐसी शर्तें उन्हें आवश्यक सहायता से वंचित करेंगी। पार्टी ने सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने और विभिन्न कल्याण कार्यक्रमों की पहुंच को व्यापक बनाए रखने का आह्वान किया है।
यह विरोध भारत में सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल पहचान से संबंधित चल रही बहस का हिस्सा है, जहां विभिन्न राजनीतिक दल ऐसी नीतियों के प्रभावों पर विचार कर रहे हैं।