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जनगणना नियम संशोधन को वापस लेने के लिए राष्ट्रपति का हस्तक्षेप मांगा
वामपंथी दल सीपीआई(एम) ने राष्ट्रपति से जनगणना नियमों में किए गए संशोधन को वापस लेने की अपील की है। पार्टी का मानना है कि विस्तारित गणकों के पूल से आंकड़ों की गोपनीयता और निरपेक्षता को खतरा है।
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सीपीआई(एम) ने भारत के राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है ताकि हाल ही में जनगणना नियमों में किए गए संशोधनों को वापस लिया जा सके। पार्टी के नेता एम.ए. बेबी ने चिंता व्यक्त की है कि इन संशोधनों से जनगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता और गोपनीयता खतरे में पड़ सकती है।
बेबी ने तर्क दिया है कि गणकों के पूल को विस्तारित करने से डेटा एकत्रण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी हो सकती है। उन्होंने इस बात की आशंका जताई है कि जनगणना का दुरुपयोग निगरानी के उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है या इसे नागरिकता निर्धारण के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
सीपीआई(एम) का मानना है कि जनगणना एक संवेदनशील प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसमें लोगों की व्यक्तिगत जानकारी शामिल होती है। पार्टी ने कहा है कि नियमों में इस तरह के बदलाव लोगों के विश्वास को कम कर सकते हैं और जनगणना की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं।
वामपंथी दल का मानना है कि इन मुद्दों को राष्ट्रपति के ध्यान में लाया जाना चाहिए क्योंकि जनगणना देश की संवैधानिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग है।