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भीड़ से जुटाए धन से सात माह के बच्चे को मिली एक करोड़ रुपये की जीन थेरेपी
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित एक शिशु को क्राउडफंडिंग के जरिए दुर्लभ आनुवंशिक रोग के इलाज के लिए आवश्यक धनराशि एकत्र हुई। यह इलाज भारत में अत्यंत महंगा और सीमित उपलब्धता वाली चिकित्सा सेवा है।
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भारत में एक सात माह के बच्चे को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) नामक दुर्लभ आनुवंशिक विकार से निजात दिलाने के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि जुटाई गई है। क्राउडफंडिंग अभियान के माध्यम से परिवार और समाज की सहायता से शिशु को अत्याधुनिक जीन थेरेपी उपचार तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
एसएमए एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसमें मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। इस रोग के लिए जीन थेरेपी विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त इलाज विधि है, लेकिन भारत में इसकी अत्यधिक कीमत इसे अधिकांश परिवारों की पहुंच से बाहर रखती है। इस चिकित्सा प्रणाली का लागत एक करोड़ रुपये के आसपास है।
ऐसे दुर्लभ रोगों से जूझ रहे बच्चों के परिवार अक्सर ऐसे अभियानों पर निर्भर होते हैं ताकि वे आवश्यक उपचार प्राप्त कर सकें। इस शिशु के मामले में, परिवार के आह्वान पर समाज के विभिन्न वर्गों ने उदारतापूर्वक योगदान दिया।
चिकित्सकों के अनुसार, जीन थेरेपी में शीघ्र हस्तक्षेप रोग की प्रगति को रोकने और बच्चे के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि ऐसी दुर्लभ बीमारियों के लिए अधिक सामर्थ्यपूर्ण और सुलभ उपचार विकल्प विकसित किए जाने की आवश्यकता है।