Politics · India Bureau
आर्थिक नीति में सांस्कृतिक पूंजी को मिले केंद्रीय स्थान: संस्कृति मंत्री
संघीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि विकास को नागरिकों की पहचान देने वाली विरासत को नष्ट नहीं करना चाहिए। उन्होंने आर्थिक नीति के ढांचे में सांस्कृतिक पूंजी को उचित महत्व दिए जाने की वकालत की।
LSN India ·

नई दिल्ली में सोमवार को कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में मुख्य भाषण देते हुए शेखावत ने कहा कि विकास और विरासत को एक-दूसरे को समृद्ध करना चाहिए, न कि एक-दूसरे को नष्ट करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक ऐसे मॉडल की आवश्यकता है जिसमें विकास विरासत की रक्षा करे और विरासत विकास को समृद्ध करे।
पर्यटन मंत्री के रूप में भी अपनी भूमिका निभाते हुए शेखावत ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के आर्थिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पूंजी अर्थव्यवस्था के विकास का एक प्रमुख इंजन हो सकती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आधुनिकता को सभ्यतागत आत्मविश्वास के साथ चलना चाहिए।
'संस्कृति को पूंजी के रूप में: विरासत से क्षितिज तक' थीम के तहत आयोजित इस सत्र में मंत्री ने अर्थशास्त्री एन के सिंह और ब्रिटिश-भारतीय पीयर लॉर्ड करण बिलिमोरिया के साथ मंच साझा किया। वित्तीय नीति निर्माता और विशेषज्ञों की इस महत्वपूर्ण बैठक में शेखावत ने विकास की अवधारणा को व्यापक बनाने की आवश्यकता बताई।