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संस्कृति संरक्षण मौलिक अधिकार है: सुप्रीम कोर्ट
निकोबार परियोजना मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की कार्यवाही को स्थगित करने से इनकार कर दिया है। याचिका में 130 वर्ग किलोमीटर से अधिक उष्णकटिबंधीय वन के हस्तांतरण और शोम्पेन तथा निकोबारीज समुदाय की संस्कृति को खतरे की बात कही गई है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी भी समुदाय की संस्कृति का संरक्षण एक मौलिक अधिकार है। इस निर्णय के साथ ही अदालत ने निकोबार परियोजना से संबंधित कलकत्ता उच्च न्यायालय की कार्यवाही को स्थगित करने की याचिका को खारिज कर दिया है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि परियोजना के तहत 130 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र के कुंवारी उष्णकटिबंधीय वन को हस्तांतरित किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह कार्रवाई वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करती है और निकोबार द्वीप समूह के स्थानीय आदिवासी समुदायों, विशेषकर शोम्पेन और निकोबारीज जनजातियों के जीवन यापन और सांस्कृतिक अस्तित्व को गंभीर खतरे में डालती है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से संकेत मिलता है कि देश की सर्वोच्च अदालत आदिवासी समुदायों के सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा को लेकर सजग है। अदालत ने माना कि विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाते समय स्थानीय समुदायों की संस्कृति और परंपरा का संरक्षण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह मामला पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी अधिकार और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन के प्रश्न पर एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। कलकत्ता उच्च न्यायालय में यह केस आगे सुनवाई के लिए जारी रहेगा।