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साइबर अपराधियों ने 44 कृत्रिम बुद्धिमत्ता एजेंटों से किए स्वचालित हमले
शोधकर्ताओं के अनुसार, साइबर अपराध करने वाले समूह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके हैकिंग के कई चरणों को स्वचालित किया है। इसमें लक्ष्य की जानकारी जुटाना, कमजोरियों का फायदा उठाना और डेटा चोरी करना शामिल है।
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साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने एक चिंताजनक प्रवृत्ति का खुलासा किया है जहां साइबर अपराधी अपने हमलों को आधुनिक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। शोधकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, एक संगठित साइबर अपराध दल ने 44 एआई एजेंटों को तैनात करके अपनी हैकिंग क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ाया है।
यह परिचालन पारंपरिक साइबर हमलों से अलग है क्योंकि यह पूरी हैकिंग प्रक्रिया को स्वचालित करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये एआई एजेंट लक्ष्य संस्थाओं की खोज करने, उनकी कमजोरियों की पहचान करने, सुरक्षा प्रणाली में प्रवेश करने और फिर संवेदनशील डेटा निकालने के काम को संभालते हैं।
यह विकास साइबर सुरक्षा समुदाय के लिए एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत करता है क्योंकि एआई-संचालित हमले मानव-संचालित हमलों की तुलना में तेजी से और बड़े पैमाने पर किए जा सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तकनीक साइबर अपराध को और अधिक प्रभावी और कठिन करने में सक्षम बनाती है।
इस खोज के बाद, साइबर सुरक्षा विभागों को अपनी रक्षा प्रणालियों को अपग्रेड करने और एआई-आधारित खतरों का मुकाबला करने के लिए नई रणनीतियां विकसित करने का आग्रह किया जा रहा है।