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डेटा सेंटर नहीं हैं भारत के जल संकट के मुख्य दोषी

भारत का जल संकट दशकों से पानी को मुफ्त संसाधन मानने की नीति का परिणाम है। केवल डेटा सेंटरों को निशाना बनाना एक खतरनाक नीतिगत भूल साबित हो सकती है।

LSN India · 1 September 2026

डेटा सेंटर नहीं हैं भारत के जल संकट के मुख्य दोषी

भारत के जल संकट की जड़ें गहरी हैं और इसका कारण एकमात्र डेटा सेंटर नहीं हैं। वास्तव में, देश के जल संकट को समझने के लिए दीर्घकालीन नीतिगत विफलताओं को देखना आवश्यक है जो पानी को बिना किसी मूल्य के संसाधन के रूप में मानती रहीं। कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग सहित कई क्षेत्रों में लंबे समय से अकुशल जल उपयोग की परंपरा चली आ रही है।

प्रौद्योगिकी क्षेत्र में डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग को भारत के समस्त जल संकट का कारण बताना तथ्यात्मक रूप से गलत निष्कर्ष होगा। जबकि ये सुविधाएं निश्चित रूप से जल का उपयोग करती हैं, लेकिन कुल उपभोग का एक छोटा हिस्सा ही इनका है। इसके बजाय, सिंचाई क्षेत्र और कृषि पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय जल बजट का सबसे बड़ा हिस्सा खपत करते आए हैं।

जल संकट से निपटने के लिए आवश्यक है कि सभी क्षेत्रों में संरक्षण और कुशल उपयोग की नीतियां लागू की जाएं। पानी को एक सीमित और मूल्यवान संसाधन के रूप में स्वीकार करना चाहिए। केवल नए उद्योगों को दोष देकर मौजूदा असक्षमताओं पर ध्यान न देना समस्या को और गहरा ही करेगा।

राष्ट्रव्यापी जल नीति में सुधार के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है जो सभी सेक्टरों को शामिल करे। इसमें जल मूल्य निर्धारण में सुधार, कृषि में आधुनिक तकनीकों का प्रचार, और पुनर्चक्रण प्रणालियों में निवेश शामिल होना चाहिए। डेटा सेंटरों को अकेले निशाना बनाना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाता है।