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1977 में मारे गए बालक की पहचान 25 साल तक धोखाधड़ी में इस्तेमाल

एक दशक पहले मारे गए नाबालिग की पहचान का दुरुपयोग करके 2.84 लाख डॉलर की धोखाधड़ी की गई। यह मामला सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में गंभीर खामियों को उजागर करता है।

LSN India · 1 October 2026

1977 में मारे गए बालक की पहचान 25 साल तक धोखाधड़ी में इस्तेमाल

सत्तर के दशक में एक बालक की अप्राकृतिक मृत्यु के बाद उसकी पहचान का दुरुपयोग करके लंबे समय तक धोखाधड़ी की गई। सूत्रों के अनुसार, 1977 में मारे गए इस बालक की व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल सरकारी लाभ और अन्य आर्थिक सहायता प्राप्त करने में किया गया।

यह धोखाधड़ी दो दशक और पांच वर्षों तक अनावृत्त रही। अनुमानित 2.84 लाख डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग 23 लाख रुपये) की राशि इस प्रकार अवैध तरीके से प्राप्त की गई। मामला तब सामने आया जब सामाजिक सुरक्षा और पहचान सत्यापन प्रणाली में विसंगतियां दर्ज की गईं।

यह घटना प्रशासनिक प्रणाली में पारदर्शिता और सत्यापन प्रक्रियाओं की कमजोरियों को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि मृत व्यक्तियों के डेटा को पर्याप्त रूप से हटाया या अपडेट नहीं किया जाता है।

संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार की बातें की जा रही हैं।