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1977 में मारे गए बालक की पहचान 25 साल तक धोखाधड़ी में इस्तेमाल
एक दशक पहले मारे गए नाबालिग की पहचान का दुरुपयोग करके 2.84 लाख डॉलर की धोखाधड़ी की गई। यह मामला सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में गंभीर खामियों को उजागर करता है।
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सत्तर के दशक में एक बालक की अप्राकृतिक मृत्यु के बाद उसकी पहचान का दुरुपयोग करके लंबे समय तक धोखाधड़ी की गई। सूत्रों के अनुसार, 1977 में मारे गए इस बालक की व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल सरकारी लाभ और अन्य आर्थिक सहायता प्राप्त करने में किया गया।
यह धोखाधड़ी दो दशक और पांच वर्षों तक अनावृत्त रही। अनुमानित 2.84 लाख डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग 23 लाख रुपये) की राशि इस प्रकार अवैध तरीके से प्राप्त की गई। मामला तब सामने आया जब सामाजिक सुरक्षा और पहचान सत्यापन प्रणाली में विसंगतियां दर्ज की गईं।
यह घटना प्रशासनिक प्रणाली में पारदर्शिता और सत्यापन प्रक्रियाओं की कमजोरियों को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि मृत व्यक्तियों के डेटा को पर्याप्त रूप से हटाया या अपडेट नहीं किया जाता है।
संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार की बातें की जा रही हैं।