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अटलांटिक में सात दशक पुराना रेडियोएक्टिव कचरा अब सतह पर आया
गहरे समुद्र में दबा रेडियोएक्टिव कचरा धीरे-धीरे रिसाव कर रहा है। वैज्ञानिकों ने समुद्र तल पर जंग लगे बैरलों से खतरनाक पदार्थ निकलते देखे हैं।
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अटलांटिक महासागर की 4700 मीटर गहराई में पाए गए हजारों जंग लगे बैरलों से रेडियोएक्टिव कचरा रिसता हुआ मिला है। ये बैरल दशकों पहले समुद्र में डाले गए थे, जब परमाणु कचरे को निपटाने के लिए महासागर को डंपिंग साइट माना जाता था। वैज्ञानिकों की हालिया जांच में यह खुलासा हुआ है कि सात दशक के दौरान इस खतरनाक सामग्री का कोई नियंत्रण नहीं रहा।
शोधकर्ताओं के अनुसार, समुद्र के तल पर मौजूद ये बैरल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। जंग के कारण कई बैरलों में दरारें आ गई हैं, जिससे रेडियोएक्टिव पदार्थ आसपास के पानी में मिल रहे हैं। समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके दीर्घकालीन प्रभाव का अभी सटीक आकलन किया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि इन दूषित क्षेत्रों के आसपास विभिन्न समुद्री जीव पनप रहे हैं। वैज्ञानिक इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ये जीव इतने विषैले माहौल में कैसे जीवित रह पा रहे हैं। यह खोज समुद्री जीवन की अनुकूलन क्षमता के बारे में महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है।
यह घटनाक्रम ऐतिहासिक परमाणु कचरा प्रबंधन की नीतियों पर फिर से विचार करने का आह्वान कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों में कसाई आई है, लेकिन इतिहास में डाले गए कचरे को निकालना अभी भी तकनीकी रूप से संभव नहीं माना जा रहा। इसके बजाय वैज्ञानिक अब दीर्घकालीन निगरानी और संभावित उपचार विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।