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डबल स्टैकिंग से तेजी आई: दोनों डीएफसी नेटवर्क का 4 प्रतिशत होकर 14 प्रतिशत माल ढुलाई संभाल रहे
पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेल नेटवर्क के महज 4 प्रतिशत हिस्से पर चलने के बावजूद कुल रेल माल ढुलाई का 14 प्रतिशत हिस्सा संभाल रहे हैं। इन कॉरिडोर ने पारगमन समय में कमी लाई है और यात्री ट्रेनों के लिए नेटवर्क क्षमता मुक्त की है।
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भारत के दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) अपनी असाधारण क्षमता के माध्यम से देश की रेलवे प्रणाली को पुनर्संरचित कर रहे हैं। पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का मात्र 4 प्रतिशत गठित करते हैं, वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर ढुलाई किए जाने वाले माल का 14 प्रतिशत संचालित कर रहे हैं।
ये डेडिकेटेड कॉरिडोर भारी और तेजी वाली माल ट्रेनों के संचालन के लिए अनुकूलित हैं। डबल-स्टैकिंग तकनीक का उपयोग करके, ये मार्ग अधिक सामग्री को कम समय में परिवहन करने में सक्षम हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इन विशेषीकृत कॉरिडोर ने पारगमन समय को काफी हद तक कम किया है, जो व्यापार और वाणिज्य के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही, पारंपरिक रेल नेटवर्क से माल ढुलाई को हटाकर, डीएफसी ने यात्री ट्रेन सेवाओं के लिए नेटवर्क क्षमता को मुक्त किया है।
डीएफसी की बढ़ती सफलता भारत की बुनियादी ढांचा विकास रणनीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो कुशल और टिकाऊ परिवहन समाधान के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देने का प्रयास करती है।