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विदेश यात्रा कर जमा करने में देरी पर जुर्माना नहीं लगेगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सऊदी अरेबियन एयरलाइंस पर लगाया गया 71.29 लाख रुपये का जुर्माना रद्द कर दिया है। कोर्ट ने फैसला दिया है कि वित्त अधिनियम के तहत 'भुगतान न करने' का प्रावधान विलंबित कर जमा करने पर लागू नहीं होता।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि विदेश यात्रा कर की राशि जमा करने में देरी को वित्त अधिनियम के तहत 'भुगतान न करने' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने सऊदी अरेबियन एयरलाइंस के खिलाफ लगाया गया 71.29 लाख रुपये का दंड रद्द कर दिया है।
यह फैसला कर कानूनों की व्याख्या को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय है। अदालत ने माना कि विलंबित जमा करने के मामले को जानबूझकर कर का भुगतान न करने वाली स्थिति से अलग माना जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वित्त अधिनियम के प्रावधान केवल उन मामलों पर लागू होते हैं जहां कर का भुगतान पूरी तरह से न किया गया हो।
इस निर्णय का असर देश भर की एयरलाइंस और अन्य उद्यमों पर पड़ सकता है जो विदेश यात्रा कर का भुगतान करते हैं। कोर्ट का यह रुख यह संकेत देता है कि विभिन्न कारणों से विलंबित जमा करने वाली स्थितियों को कठोरता से नहीं देखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय कर प्रशासन के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करता है। राजस्व विभाग को अब ऐसे मामलों में अंतर करना होगा कि क्या विलंब जानबूझकर किया गया था या किन्हीं अन्य कारणों से हुआ था।