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दिल्ली की छात्राएं कहती हैं: कर्फ्यू नहीं, सड़कों को ठीक करो
दिल्ली के कॉलेजों में पढ़ने वाली महिला छात्राएं परिसर से बाहर की सड़कों, पार्कों और मेट्रो स्टेशनों पर अपनी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रही हैं। वे रूट बदलना, समूह में यात्रा करना और अंधेरे के बाद कुछ सड़कों से बचना आम बात बता रही हैं।
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दिल्ली की महिला छात्राएं अपने दैनिक आवागमन में सुरक्षा को लेकर लगातार समझौते के साथ जी रही हैं। कॉलेज परिसर के बाहर सड़कों, पार्कों, मेट्रो स्टेशनों और आवासीय इलाकों में उन्हें असुरक्षित महसूस होता है। अपनी सुरक्षा के लिए छात्राएं अपना रूट बदलती हैं, समूह में यात्रा करती हैं और अंधेरा होने के बाद कुछ इलाकों से दूरी बनाती हैं। कई छात्राएं कॉलेज से जल्दी निकलने पर विवश महसूस करती हैं। ये प्रतिबंध छात्राओं की गतिविधियों और स्वतंत्रता को सीमित करते हैं। छात्राओं का मानना है कि शहर की बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा में सुधार जरूरी है। उनके अनुसार समस्या का समाधान प्रतिबंध नहीं, बल्कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाना है। दिल्ली की महिला छात्राओं की ये आवाजें शहर की सुरक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार की जरूरत को उजागर करती हैं।