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दिल्ली कोर्ट ने NIA आतंकवाद मामले में छह यूक्रेनी नागरिकों को दिया जमानत
राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा निर्धारित समय सीमा में चार्जशीट दाखिल न करने के कारण कोर्ट ने डिफ़ॉल्ट जमानत दी। यह राहत मिलने से कुछ दिन पहले एक अमेरिकी नागरिक को म्यांमार षड्यंत्र प्रकरण में समान परिस्थितियों में जमानत मिली थी।
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दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के एक आतंकवाद संबंधी मामले में छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफ़ॉल्ट जमानत प्रदान कर दी है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि NIA को निर्धारित 180 दिन की अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल करने में विफल रहे हैं।
कानूनी प्रक्रिया के तहत जब जांच एजेंसी को अपेक्षित समयावधि में अभियोग पत्र दाखिल नहीं करना पड़ता है, तो अदालत आरोपियों को जमानत देने के लिए बाध्य होती है। यह राहत छह यूक्रेनी आरोपियों को न्यायिक हिरासत से मुक्त करता है।
यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि जांच एजेंसियों को कानूनी समयसीमा का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार की परिस्थितियों में, म्यांमार षड्यंत्र मामले में एक अमेरिकी नागरिक को भी हाल ही में डिफ़ॉल्ट जमानत दी गई थी जब NIA ने समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं किया था।
ऐसे मामले भारतीय न्याय प्रणाली में प्रक्रियात्मक न्याय के महत्व को प्रदर्शित करते हैं। अदालतें आरोपियों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त प्रक्रियात्मक नियमों का पालन सुनिश्चित करती हैं, भले ही आरोप गंभीर हों।