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बच्चे को गोद लेने का कानूनी अधिकार केवल रेफरल से नहीं मिलता: दिल्ली HC
दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि संभावित दत्तक माता-पिता केवल बच्चे का रेफरल स्वीकार करने और केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण (CARA) से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी करने से गोद लेने का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं कर सकते।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में केवल CARA रेफरल स्वीकार करना किसी भी दंपति को बच्चे को गोद लेने का अधिकार नहीं देता है। न्यायालय ने माना है कि यदि संभावित दत्तक माता-पिता (PAPs) कानूनी रूप से गोद लेने के योग्य नहीं हैं, तो वे गोद लेने का कोई प्रवर्तनीय अधिकार प्राप्त नहीं कर सकते।
यह निर्णय दत्तक ग्रहण कानून की व्याख्या में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। न्यायालय ने कहा कि केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण की ओर से कोई भी कार्यवाही या अनापत्ति प्रमाण पत्र तब तक वैध नहीं हो सकता जब तक कि आवेदक पूरी तरह से कानूनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं।
यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहां पारिवारिक पृष्ठभूमि, आयु, आय या अन्य कानूनी मानदंडों के आधार पर आवेदकों को अयोग्य ठहराया जाता है। दिल्ली HC का यह निर्णय दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में कानूनी मानकों के कठोर अनुपालन को बनाए रखने का आह्वान करता है।
यह व्यवस्था बाल कल्याण सुनिश्चित करने और दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से भारत में दत्तक ग्रहण कानून को सही दिशा मिलेगी।