Politics · India Bureau
मुकदमे का सामना कर रहे आरोपी को विदेश यात्रा का अप्रतिबंधित अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि जो व्यक्ति किसी अपराध का आरोप का सामना कर रहे हैं, उन्हें विदेश जाने का असीम अधिकार नहीं है। अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार संबंधी दलीलों को खारिज कर दिया है।
LSN India ·

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने हालिया फैसले में स्पष्ट किया है कि आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे आरोपियों को बिना शर्त के विदेश यात्रा का अधिकार नहीं दिया जा सकता। अदालत का यह निर्णय एक ऐसे मामले में आया है जहां एक आरोपी ने अपने विदेश यात्रा पर लगाई गई पाबंदी को असंवैधानिक बताया था।
आरोपी की ओर से यह दलील दी गई थी कि विदेश जाने पर लगाई गई प्रतिबंध भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। अनुच्छेद 21 व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार की सुरक्षा देता है।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में माना कि जहां किसी व्यक्ति पर आपराधिक मामला दर्ज है और वह न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा है, वहां न्यायालय उसकी गतिविधियों पर उचित प्रतिबंध लगा सकता है। अदालत के अनुसार, ऐसे प्रतिबंध न्याय की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने और आरोपी के भागने की संभावना को रोकने के लिए आवश्यक हो सकते हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मौलिक अधिकार पूर्ण और अप्रतिबंधित नहीं होते, विशेषकर तब जब कोई व्यक्ति किसी अपराध का आरोपी हो। न्यायालय के अनुसार, राज्य के पास अपनी न्याय प्रणाली की अखंडता बनाए रखने के लिए ऐसी पाबंदियां लगाने का अधिकार है।