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दिल्ली हाईकोर्ट ने सीमेंट कार्टेल मामले में बिल्डरों संगठन की भूमिका को मंजूरी दी
न्यायालय ने कहा कि पर्याप्त हित रखने वाला कोई भी व्यक्ति, इकाई या पक्ष सीसीआई की कार्यवाही में भाग ले सकता है यदि ऐसी भागीदारी मामले में सहायता करे या जनहित को पूरा करे।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा सीमेंट कार्टेल जांच में भारतीय निर्माताओं के संगठन की भूमिका को बरकरार रखा है। न्यायालय के इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि उस मामले में पर्याप्त हित रखने वाली किसी भी इकाई को सीसीआई की कार्यवाही में हिस्सा लेने का अधिकार है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि ऐसी भागीदारी तभी स्वीकार्य है जब वह विवाद निपटारे में वास्तविक योगदान दे सके अथवा व्यापक जनहित के अनुरूप हो। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की भागीदारी का दायरा काफी व्यापक हो सकता है और केवल सीधे प्रभावित पक्षों तक सीमित नहीं है।
सीमेंट उद्योग में कार्टेल संबंधी जांच में इस निर्णय का महत्वपूर्ण निहितार्थ है। निर्माता संगठन जैसे हितधारक अब औपचारिक रूप से ऐसी कार्यवाहियों में अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे प्रतिस्पर्धा संबंधी मामलों में पारदर्शिता और व्यापक परिप्रेक्ष्य आने की संभावना बढ़ गई है।
यह निर्णय प्रतिस्पर्धा कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करता है। अब अन्य उद्योग संघ और हित समूह भी समान आधार पर सीसीआई की जांच कार्यवाहियों में अपनी भागीदारी के लिए दावा कर सकेंगे, बशर्ते उनकी भागीदारी मामले के निपटारे और जनहित में योगदान दे सकती हो।