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बाल गोद लेने में रेफरल मिलना गारंटी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सिंगापुर के एक व्यक्ति की गोद लेने संबंधी अपील खारिज की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चे का रेफरल मिलना गोद लेने की गारंटी नहीं देता, यदि माता-पिता योग्य नहीं हैं।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केंद्रीय बालक सदन (कारा) द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया में बच्चे का रेफरल मिलना अपने आप में गोद लेने की प्रक्रिया पूरी होने की गारंटी नहीं देता। सिंगापुर में रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा दायर की गई अपील को खारिज करते हुए कोर्ट ने यह निर्णय दिया। व्यक्ति ने कारा के गोद लेने के आवेदन को खारिज करने के खिलाफ न्यायालय में मामला दायर किया था।
कोर्ट के अनुसार, यदि माता-पिता गोद लेने की योग्यता की शर्तें पूरी नहीं करते हैं, तो गोद लेने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया नहीं जा सकता। इसका अर्थ है कि भले ही किसी बच्चे का रेफरल कर दिया जाए, लेकिन यदि आवेदनकर्ता कानूनी और अन्य आवश्यक मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, तो गोद लेने की प्रक्रिया रोकी जा सकती है।
यह निर्णय गोद लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के कड़े अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। कोर्ट का यह फैसला दर्शाता है कि बच्चों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है और गोद लेने की प्रक्रिया केवल तभी आगे बढ़ाई जाती है जब सभी योग्यता मानदंड पूरे हों।