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दिल्ली हाईकोर्ट ने एयरलाइन कर्मचारियों के दुर्व्यवहार के खिलाफ तंत्र की याचिका खारिज की
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला की याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें एयरलाइन स्टाफ के विरुद्ध दुर्व्यवहार से निपटने के लिए एक संस्थागत तंत्र स्थापित करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि एयरलाइन के एक ग्राहक सेवा अधिकारी ने उसके साथ बातचीत के दौरान अभद्र और लैंगिक भाषा का इस्तेमाल किया।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला की जनहित याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें एयरलाइन कंपनियों के खिलाफ यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए एक व्यवस्थित तंत्र की स्थापना की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा था कि एक प्रमुख एयरलाइन के ग्राहक सेवा विभाग के एक अधिकारी ने उससे बातचीत के दौरान अभद्र, गालीपूर्ण और लैंगिक रूप से आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था।
याचिका में याचिकाकर्ता ने विमान परिवहन उद्योग में यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार की बढ़ती घटनाओं की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया था। उन्होंने न्यायालय से एक सामान्य संरचना और नीति निर्माण की याचिका की थी जो सभी एयरलाइन परिचालकों को एकीकृत दिशानिर्देश प्रदान करे और यात्रियों की शिकायतों के निवारण के लिए एक प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करे।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायालय का मत था कि ऐसे विनियामक मामलों को संबंधित प्राधिकारियों और नियामक निकायों के माध्यम से ही संबोधित किया जाना चाहिए। न्यायालय ने सुझाव दिया कि पीड़ित पक्ष को उपभोक्ता संरक्षण एक्ट के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करनी चाहिए।