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परीक्षा प्रतिबंध पर दिल्ली HC का कड़ा प्रहार, SSC को झिड़की
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कर्मचारी चयन आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने कहा कि बिना सुनवाई के परीक्षार्थियों को तीन साल के लिए परीक्षा से प्रतिबंधित करना नागरिक मृत्यु जैसा है।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने कहा कि किसी परीक्षार्थी की उम्मीदवारी को रद्द करने और उसे बिना कोई सुनवाई का अवसर दिए परीक्षाओं से प्रतिबंधित करना अत्यंत गंभीर परिणाम देता है।
न्यायालय के अनुसार, ऐसी कार्रवाई से आजीवन कलंक का दाग लगता है और यह "नागरिक मृत्यु के लगभग समान" है। इस तरह के प्रतिबंध से किसी व्यक्ति के भविष्य और सामाजिक प्रतिष्ठा पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
न्यायालय ने जोर देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को दंड देने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। यह न्यायिक प्रक्रिया का एक मौलिक सिद्धांत है और SSC जैसी सरकारी संस्थाओं को इसका कड़ाई से पालन करना चाहिए।
यह फैसला परीक्षा आयोजन प्राधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही कोई गलत काम किया गया हो, लेकिन दंड देते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है।